महाभारत युद्ध के लिए श्री क्रष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि को ही क्यों चुना

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Why did Shri Krishna choose the land of Kurukshetra for the Mahabharata war – महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में क्यों हुआ था !

 महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में क्यों हुआ था !
महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में क्यों हुआ था !

हम सब जानते है की महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था ! लेकिन बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे की आखिर भगवान श्री क्रष्ण ने कुरुक्षेत्र को ही महाभारत युद्ध के लिए चयनित किया ! आज हम आपको इसके पीछे का पूरा रहस्य बताने वाले है ! महाभारत का युद्ध भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है ! इस युद्ध में कोरवो की हार हुयी थी, और पांडवो की विजय हुयी थी ! 

जब महाभारत युद्ध होने का निश्चय हो गया तो उसके लिये जमीन तलाश की जाने लगी ! श्रीकृष्ण जी बढ़ी हुई असुरता से ग्रसित व्यक्तियों को उस युद्ध के द्वारा नष्ट कराना चाहते थे ! पर भय यह था कि यह भाई-भाइयों का, गुरु शिष्य का, सम्बन्धी कुटुम्बियों का युद्ध है ! एक दूसरे को मरते देखकर कहीं सन्धि न कर बैठें ! इसलिए ऐसी भूमि युद्ध के लिए चुननी चाहिए जहाँ क्रोध और द्वेष के संस्कार पर्याप्त मात्रा में हों !

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This was due to the selection of Kurukshetra for the Mahabharata war ! (यह कारण था महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र की भूमि पर ही लड़ने का)

श्री कृष्ण ने अपने सभी दूतो को सभी दिशाओ में भेजा ! कि वहाँ की घटनाओं का वर्णन आकर उन्हें सुनायें ! एक दूत ने सुनाया कि अमुक जगह बड़े भाई ने छोटे भाई को खेत की मेंड़ से बहते हुए वर्षा के पानी को रोकने के लिए कहा ! पर उसने स्पष्ट इनकार कर दिया और उलाहना देते हुए कहा-तू ही क्यों न बन्द कर आवे ! मैं कोई तेरा गुलाम हूँ ! इस पर बड़ा भाई आग बबूला हो गया ! उसने छोटे भाई को छुरे से गोद डाला और उसकी लाश को पैर पकड़कर घसीटता हुआ ! उस मेंड़ के पास ले गया और जहाँ से पानी निकल रहा था ! वहाँ उस लाश को पैर से कुचल कर लगा दिया !

इस नृशंसता को सुनकर श्रीकृष्ण ने निश्चय किया ! यह भूमि भाई-भाई के युद्ध के लिए उपयुक्त है ! यहाँ पहुँचने पर उनके मस्तिष्क पर जो प्रभाव पड़ेगा उससे परस्पर प्रेम उत्पन्न होने या सन्धि चर्चा चलने की सम्भावना न रहेगी ! वह स्थान कुरुक्षेत्र था वहीं युद्ध रचा गया ! महाभारत की यह कथा इंगित करती है की शुभ और अशुभ विचारों एवं कर्मों के संस्कार भूमि में देर तक समाये रहते हैं ! इसीलिए ऐसी भूमि में ही निवास करना चाहिए जहाँ शुभ विचारों और शुभ कार्यों का समावेश रहा हो !


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