भीम में 10 हजार हाथियों का बल कैसे आया ? Story Of Bhima In Hindi

नमस्कार दोस्तों Speed India 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. आज हम आपके लिए महाभारत से जुड़ा रहस्य लेकर आये है. महाभारत से जुड़े ऐसे कई रहस्य है, जो आज भी एक पहेली बने हुए है. जिन्हें आज तक कोई नई सुलझा सका है. लेकिन हम आज आपको ऐसा रहस्य बतायेंगे जिससे आप आज तक अनजान थे. लेकिन आपने कभी ना कभी इसके बारे में सोचा जरुर होगा. आखिर “भीम में 10 हजार हाथियों का बल कैसे आया ?”

ये सवाल आपके मन में भी जरुर आया होगा. कुछ दिनों पहले मेरे एक मित्र ने भी ऐसा ही सवाल मुझसे किया था. इसलिए मेने सोचा क्यों न इस टॉपिक पर एक पोस्ट लिखी जाये ताकि सभी को इस अद्भुत रहस्य के बारे में पता चले. आखिर क्यों भीम इतने शक्तिशाली थे ?


भीम में 10 हजार हाथियों का बल कैसे आया ? | Story of Bhim In Hindi

भीम राजा पांडू के पुत्र थे. लेकिन वायुदेव जिन्होंने भगवान हनुमानजी को जन्म दिया था, इन्ही के वरदान से भीम का जन्म हुआ था. आप सब जानते ही होंगे की भीम महाभारत युद्ध के सबसे बलशाली योद्धा थे. भीम ने ही दुर्योधन और सभी कोरवो का वध किया था. और दुशासन की छाती चीर रक्त पान किया था. भीम इतने बलशाली थे की उन्हें किसी भी युद्ध में पराचित करना असंभव था. आखिर भीम इतने बलशाली कैसे हुए. क्यों भीम में 10 हजार हाथियों का बल था ? आईये जानते है. 

भीम में 10 हजार हाथियों का बल कैसे आया ?
भीम द्वारा दुशासन वध

भीम के बलशाली होने के प्रमाण तो बचपन से ही मिल गए थे. एक दिन जब माता कुंती भीम को अपनी गोद में लिए वन में विश्राम कर रही थी. तब अचानक से वहा एक बाघ आ गया. माता कुंती बाघ को देखकर इतनी डर गयी की तुरंत वहा से भागने के लिए खड़ी हो गयी. उन्हें ये पता भी नहीं चला की भीम उनकी गोद में है. देवी कुंती के इस तरह खड़े हो जाने से बालक भीम माता की गोद से छिटककर एक चट्टान पर जा गिरे. बालक भीम के गिरने से वह चट्टान कई टुकडो में टूट गयी थी. परन्तु वह घटना से उस बलवान बालक भीम को जरा से भी चोट नहीं आई थी. यह देख कर राजा पांडू और देवी कुंती दोनों काफी आश्चरिय में पड़ गए थे. 

कुछ समय पश्चात राजा पांडू की मृत्यु हो गयी. राजा पांडू की मृत्यु के बाद देवी कुंती और पांचो पाण्डव भाई रहने हस्तिनापुर चले गए थे. सभी पाण्डव और कोरव एक साथ रहने और खेलने लगे. भीम खेल-खेल में सभी कोरव भाइयो को बहुत मारा करते थे. जिसके कारण सभी कोरव भाई भीम से बहुत परेशान हो गए थे. इसलिए एक दिन दुर्योधन ने भीम के खाने में उस समय ज़हर मिला दिया जब सभी बच्चे गंगा नदी के किनारे जल विहार करने गए थे. और जब भीम ज़हर के असर से अचेत पड़ गए थे. तब दुर्योधन ने भीम को बंधवाकर गंगा नदी में फिकवा दिया था.

दोस्तों जब भीम अपनी उस अवस्था में ही नाग लोक पहुच गए. तब वहा के नांगो ने भीम को मारडालने के लिए उन्हें डसना शुरू कर दिया. लेकिन नांगो द्वारा इस तरह डसने से भीम के उस ज़हर का असर खत्म हो गया, और भीम को होश आ गया. होश में आने के बाद जब भीम की नज़र अपने चारो और खड़े नांगो पर पड़ी तो भीम ने उन्हें पकड़कर मारना शुरू कर दिया. कई नांगो के मर जाने के बाद दुसरे सभी नांग वहा से भाग गए और जाकर सारी बात नागराज़ वासुकी को बताई. 

इसके बाद नागराज़ वासुकी अपने सभी साथियों के साथ भीम के पास आये. नागराज वासुकी के एक साथी आर्यक ने भीम को पहचान लिया क्योकि वह आर्यक नाग भीम के नाना का नाना था. तब नाग आर्यक ने नागराज वासुकी से निवेदन करके भीम को नागलोक के उन कुण्डो का रस पिलवाया, जिसे पि लेने से हजारो हाथियों का बल प्राप्त हो जाता था. इस प्रकार ही महाबली भीम को 10 हजार हाथियों के सम्मान बल प्राप्त हो गया था.


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